Electricity Tariff Hike: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिजली दरों में औसतन 30% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंपा है. यह प्रस्ताव ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 35 से 45% तक की बढ़ोतरी का संकेत देता है, जो अब तक की सबसे बड़ी प्रस्तावित वृद्धि मानी जा रही है.
ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक असर
प्रस्ताव के अनुसार, ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 40 से 45% और शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 35 से 40% तक की वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है. इसके साथ ही कामर्शियल उपभोक्ताओं के लिए 20-25% और उद्योगों के लिए 15-18% तक दरें बढ़ाई जा सकती हैं.
19644 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला
UPPCL ने प्रस्ताव में दावा किया है कि उसे आगामी वित्तीय वर्ष में लगभग 19644 करोड़ रुपये का घाटा होने की आशंका है. जिसे कवर करने के लिए दरों में यह बड़ी बढ़ोतरी जरूरी है. इसके साथ ही कॉर्पोरेशन ने बिजली कनेक्शन की नई दरों के लिए ‘कास्ट डाटा बुक’ भी नियामक आयोग को सौंप दी है. जिसमें 25 से 30% तक की वृद्धि का सुझाव है.
उपभोक्ता परिषद ने जताई आपत्ति
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि बिजली दरों पर सार्वजनिक सुनवाई पहले ही शुरू हो चुकी है और आंकड़े अखबारों में प्रकाशित हो चुके हैं. ऐसे में अब नई श्रेणीवार वृद्धि का प्रस्ताव देना असंवैधानिक है.
बिजली निजीकरण का प्रस्ताव भी पेश
बिजली दरों में वृद्धि के साथ-साथ पावर कॉर्पोरेशन ने बिजली कंपनियों के निजीकरण का प्रस्ताव भी नियामक आयोग में पेश किया है. यह प्रस्ताव पांच प्रतियों में जमा किया गया है. ताकि आयोग इस पर अभिमत जारी कर सके.
पूर्व में भी हो चुकी है आपत्ति स्वीकार
यह पहली बार नहीं है जब पावर कॉर्पोरेशन ने इस तरह से बीच में प्रस्ताव भेजा है. इससे पहले भी उपभोक्ता परिषद की आपत्ति पर आयोग ने बीच में आए प्रस्ताव को खारिज किया था. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आयोग इस बार भी संविधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए निर्णय लेगा.
33122 करोड़ की रिकवरी के बावजूद दरों में बढ़ोतरी पर सवाल
उपभोक्ता परिषद ने यह भी कहा है कि बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं से पहले ही 33122 करोड़ रुपये की वसूली की है. इसके बावजूद दरों में 45% तक की वृद्धि प्रस्तावित करना अनुचित है. परिषद का कहना है कि इतने बड़े लाभ के बाद दरों में कमी की जानी चाहिए, न कि वृद्धि.
पावर कॉर्पोरेशन के नए प्रस्ताव का औसत असर
| श्रेणी | प्रस्तावित वृद्धि (%) |
|---|---|
| शहरी घरेलू | 35-40% |
| ग्रामीण घरेलू | 40-45% |
| कमर्शियल | 20-25% |
| उद्योग | 15-18% |
| औसत वृद्धि | 29-30% |