Rajasthan Monsoon Update: राजस्थान का थार मरुस्थल, जो अपनी शुष्कता और गर्मी के लिए जाना जाता है. अब हरियाली की ओर बढ़ रहा है. पिछले दो दशकों में यहां वनस्पति में 38% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि एक अभूतपूर्व परिवर्तन है. यह बदलाव मुख्यतः मानसून की बारिश में 64% की वृद्धि और भूजल के अत्यधिक उपयोग के कारण हुआ है.
मानसून की बारिश में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2001 से 2023 के बीच थार क्षेत्र में वार्षिक वर्षा में 64% की वृद्धि हुई है, जो कि औसतन 4.4 मिमी प्रति वर्ष है. यह वृद्धि मुख्यतः गर्मी के मानसून के दौरान हुई है. जिससे मिट्टी की नमी बढ़ी है और वनस्पति को पनपने का अवसर मिला है. यह परिवर्तन थार को उन चार प्रमुख मरुस्थलों में शामिल करता है. जहां वर्षा में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है.
भूजल का योगदान और कृषि विस्तार
थार क्षेत्र में वनस्पति वृद्धि में भूजल का योगदान 55% है. जबकि वर्षा का योगदान 45% है. मानसून के दौरान वर्षा का योगदान 66% होता है, जबकि गैर-मानसून महीनों में भूजल का योगदान 67% तक बढ़ जाता है. इस क्षेत्र में 1980 से 2015 के बीच कृषि भूमि में 74% और सिंचित क्षेत्र में 24% की वृद्धि हुई है. यह विस्तार मुख्यतः इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भूजल के उपयोग के माध्यम से संभव हुआ है.
जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण
थार मरुस्थल दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला मरुस्थल बन गया है. 2000 से 2020 के बीच, इस क्षेत्र में जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसके साथ ही 1985 से 2020 के बीच शहरी क्षेत्रों में 50% से 800% तक की वृद्धि देखी गई है. यह वृद्धि मुख्यतः कृषि संभावनाओं और सस्ती भूमि के कारण हुई है.
भविष्य की चुनौतियाँ और सतत विकास की आवश्यकता
हालांकि थार में हरियाली का विस्तार एक सकारात्मक संकेत है. लेकिन इसके साथ कई चुनौतियाँ भी हैं. भूजल का अत्यधिक उपयोग इसके स्तर को घटा रहा है. जिससे भविष्य में जल संकट की संभावना है. इसके अलावा बढ़ते तापमान और गर्मी के चरम स्तर कृषि और मानव जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं. इसलिए सतत जल प्रबंधन, सूखा-प्रतिरोधी फसलों का उपयोग और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास आवश्यक है.