Red Zone Plot Ownership: सोनीपत जिले के निवासियों के लिए लाल डोरे की प्रॉपर्टी पर अधिकार पाने की दिशा में बड़ी राहत की खबर आई है. नगर निगम मेयर राजीव जैन ने घोषणा की है कि अब लाल डोरे क्षेत्र की संपत्तियों पर मालिकाना हक पाने की प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट किया जाएगा. इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों और नियमों की जानकारी भी साझा की गई है. जिससे हजारों लोग जो वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे थे. अब अपनी संपत्तियों का मालिकाना हक पाने की ओर एक ठोस कदम बढ़ा सकेंगे.
मेयर राजीव जैन ने की पार्षदों के साथ अहम बैठक
इस विषय पर नगर निगम कार्यालय में मेयर राजीव जैन ने पार्षदों के साथ विशेष बैठक की. बैठक में यह चर्चा हुई कि लाल डोरे में आने वाली संपत्तियों का मालिकाना हक कैसे सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए नागरिकों को क्या प्रक्रिया अपनानी होगी. उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं चंडीगढ़ के उच्च अधिकारियों से संपर्क कर स्पष्ट दिशा-निर्देश हासिल किए हैं.
10 साल पुराना पानी या बिजली का बिल होगा अनिवार्य दस्तावेज
नई प्रक्रिया के अनुसार, अब लाल डोरे की प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के आवेदन के लिए यह आवश्यक होगा कि आवेदक के पास कम से कम 10 साल पुराना पानी या बिजली का बिल हो. यह दस्तावेज स्वामित्व के प्रमाण के रूप में कार्य करेगा और यह दिखाएगा कि व्यक्ति लंबे समय से उस प्रॉपर्टी में निवासरत है.
खरीदी गई संपत्ति के लिए राजस्व अधिकारी से सत्यापित एग्रीमेंट अनिवार्य
यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में लाल डोरे की सीमा के अंदर कोई प्रॉपर्टी खरीदी है, तो उसके पास राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) द्वारा सत्यापित एग्रीमेंट होना आवश्यक होगा. यह सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति का क्रय-विक्रय वैध रूप से हुआ है और वह व्यक्ति कानूनी रूप से उसका दावेदार है.
5 साल पुराना मीटर भी चलेगा, जानिए कैसे
मेयर जैन ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति वर्तमान में लाल डोरे की प्रॉपर्टी में निवास कर रहा है, और उसके नाम पर कम से कम 5 साल पुराना बिजली या पानी का मीटर है, तो भी उसका फार्म स्वीकार किया जाएगा. हालांकि इस स्थिति में एक शर्त यह भी होगी कि पुराने मालिक के नाम पर 10 साल पुराना मीटर उपलब्ध हो.
खाली प्लॉट के लिए निगम के नाम पर किया जा सकता है आवेदन
यदि लाल डोरे की प्रॉपर्टी एक खाली प्लॉट है और वहां पर कोई निर्माण नहीं हुआ है, तो आवेदक नगर निगम के नाम पर आवेदन प्रस्तुत कर सकता है. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्लॉट पर कब्जा करने की कोशिश नहीं हो रही और वास्तविक लाभार्थी को हक मिल रहा है.
लंबे समय से चल रही थी मांग, अब हल की ओर
सोनीपत में लाल डोरे की प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक की मांग लंबे समय से चल रही थी. हजारों लोग इन संपत्तियों में वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उनके पास स्वामित्व का कोई वैध प्रमाण नहीं था. इस कारण उन्हें बैंक लोन, ट्रांसफर या संपत्ति के नामांतरण जैसे मामलों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.
नई व्यवस्था से मिलेगा स्थायी समाधान
इस नई व्यवस्था से अब लोगों को सरकारी प्रक्रिया के अंतर्गत अपने अधिकार मिलेंगे. इससे एक ओर जहां संपत्तियों का रिकॉर्ड दुरुस्त होगा. वहीं निगम को भी बेहतर कर वसूली का लाभ मिलेगा.
क्या है लाल डोरा और इससे जुड़ी समस्याएं?
लाल डोरा वह सीमा होती है जो किसी गांव या कस्बे की आबादी क्षेत्र को दर्शाने के लिए खींची जाती है. आमतौर पर गांवों में यह सीमा 100 साल से भी पुरानी होती है और इसमें आने वाली संपत्तियों को सरकारी रिकॉर्ड में निजी स्वामित्व नहीं माना जाता. इसी वजह से वहां रहने वाले लोग प्रॉपर्टी के मालिक होकर भी सरकारी कागजों में केवल कब्जेदार माने जाते हैं.
डिजिटल रिकॉर्ड से होगा फायदा
मेयर राजीव जैन का कहना है कि सभी आवेदन और दस्तावेजों को डिजिटली संकलित किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी विवाद या धोखाधड़ी से बचा जा सके. इससे संपत्तियों का एक पारदर्शी और कानूनी रिकॉर्ड बन सकेगा. जिसे राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.