Second Hand Car: भारत में सेकेंड हैंड कार खरीदना अब आम चलन बन गया है. ये कारें बजट में फिट होती हैं और पहली बार गाड़ी खरीदने वालों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती हैं. लेकिन सिर्फ कीमत देखकर पुरानी कार खरीदने का फैसला करना कई बार भारी नुकसान का कारण बन सकता है. इसलिए जरूरी है कि खरीदने से पहले कुछ जरूरी पहलुओं की गहन जांच की जाए.
1. सर्विस रिकॉर्ड से मिलती है कार की असली कहानी
पुरानी कार की सर्विस हिस्ट्री उसके रखरखाव की असल जानकारी देती है. इससे पता चलता है कि गाड़ी की समय-समय पर सर्विसिंग हुई या नहीं. यदि सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो गाड़ी की हालत पर शक किया जा सकता है. बेहतर होगा कि ऐसी गाड़ी से दूरी बनाई जाए जिसका मेंटेनेंस इतिहास स्पष्ट न हो.
2. इंजन की स्थिति की जांच सबसे जरूरी
कार का इंजन उसका दिल होता है. टेस्ट ड्राइव के दौरान यदि इंजन से कोई असामान्य आवाज़, स्टार्टिंग में दिक्कत या पिकअप में कमी दिखे, तो समझिए कुछ गड़बड़ है. इसके अलावा इंजन ऑयल का रंग और स्तर भी चेक करें. अगर तेल बहुत गहरा या गंदा हो, तो इंजन की हालत खराब हो सकती है.
3. गाड़ी के दस्तावेज़ जांचना न भूलें
RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), इंश्योरेंस पॉलिसी, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और टैक्स पेमेंट जैसे दस्तावेज़ पूरे और वैध हैं या नहीं, इसकी पुष्टि जरूरी है. RC से यह भी पता चलता है कि कार कितने मालिकों के पास रही है. बिना वैध डॉक्युमेंट्स की गाड़ी खरीदना कानूनी झंझटों में फंसा सकता है.
4. एक्सीडेंट और डैमेज का इतिहास जरूर देखें
कार के बॉडी पैनल, पेंट, चेसिस नंबर और पिलर आदि की जांच करें. अगर आपको कलर का फर्क, वेल्डिंग के निशान या असमान गैप्स नजर आएं, तो समझिए कि गाड़ी किसी बड़े एक्सीडेंट का शिकार हो चुकी है. इसके अलावा, इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री से भी पता चलता है कि गाड़ी पहले कब और कैसे क्षतिग्रस्त हुई.
5. ओडोमीटर रीडिंग की सच्चाई को परखें
कुछ डीलर्स ओडोमीटर में छेड़छाड़ करके कार को कम चला हुआ दिखा सकते हैं. इसकी पुष्टि के लिए सीट्स की घिसावट, ब्रेक और क्लच पैडल की कंडीशन, और टायर की हालत का निरीक्षण करें. अगर ये ज़्यादा घिसे हैं और ओडोमीटर कम माइलेज दिखा रहा है, तो ये धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है.
6. थर्ड पार्टी मैकेनिक से कराएं पूरी जांच
कार खरीदने से पहले किसी अनुभवी मैकेनिक से पूरी तकनीकी जांच जरूर करवाएं. इससे आपको इंजन, ब्रेक्स, सस्पेंशन, गियर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सही स्थिति का पता चल सकेगा. यह मामूली खर्च आपको भविष्य में भारी नुकसान से बचा सकता है.