RBI Action: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियमों के उल्लंघन को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा की छह नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) का सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) रद्द कर दिया है. 12 जून 2025 को जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई. RBI की इस कार्रवाई के बाद ये कंपनियां अब एनबीएफसी के तौर पर कोई भी वित्तीय गतिविधि नहीं कर सकेंगी.
RBI एक्ट के तहत की गई कार्रवाई
यह निर्णय RBI अधिनियम 1934 की धारा 45IA(6) के तहत लिया गया है. RBI के अनुसार जिन कंपनियों पर यह कार्रवाई हुई है. उन्होंने नियामकीय मानकों का पालन नहीं किया था. इसके चलते उनके CoR को रद्द करना आवश्यक समझा गया. इससे पहले भी RBI ऐसी कई NBFC कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है जो नियमानुसार संचालन में विफल रही थीं.
ओडिशा की एक और पश्चिम बंगाल की पांच कंपनियों पर गिरी गाज
आरबीआई की कार्रवाई में ओडिशा की एक और पश्चिम बंगाल की पांच कंपनियों के नाम शामिल हैं. ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित Adhikar Microfinance Pvt. Ltd. का CoR 22 मई 2025 को रद्द किया गया. यह कंपनी 22 अक्टूबर 2013 को NBFC के रूप में पंजीकृत हुई थी. वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित जिन पांच कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए गए, उनके नाम हैं:
- Voffin Leasing and Finance Pvt. Ltd. (बावबाजार), CoR: 23 मई 2008
- Outram Properties Pvt. Ltd.
- SCM Holdings Pvt. Ltd.
- Kalash Vyapar Pvt. Ltd.
- Everest Vinimay Pvt. Ltd.
इन कंपनियों का CoR 16 मई 2025 को रद्द किया गया.
अब नहीं कर सकेंगी एनबीएफसी के रूप में व्यवसाय
RBI द्वारा CoR रद्द किए जाने के बाद ये कंपनियां अब भारत में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन (NBFI) के रूप में किसी भी प्रकार का बिजनेस नहीं कर सकतीं. इसका अर्थ है कि ये कंपनियां अब न तो ऋण दे सकती हैं, न निवेश योजनाएं चला सकती हैं और न ही कोई क्रेडिट लिंक्ड सेवा प्रदान कर सकती हैं.
चार एनबीएफसी ने खुद किया लाइसेंस सरेंडर
इस बीच, चार अन्य NBFC कंपनियों ने अपने सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन स्वयं सरेंडर कर दिए हैं. इन कंपनियों ने विभिन्न कारणों से फाइनेंशियल सेक्टर से बाहर निकलने का निर्णय लिया.
इनमें शामिल हैं:
- Benko Finance & Investment Pvt. Ltd. (मुंबई, महाराष्ट्र)
- Pamnani Capita Pvt. Ltd. (मुंबई, महाराष्ट्र)
- Parry Investments Ltd. (तमिलनाडु)
- Synergy Synthetics Pvt. Ltd. (महाराष्ट्र)
RBI ने इन कंपनियों के CoR को 22 मई 2025 को रद्द करने का आदेश जारी किया.
किन कारणों से कंपनियों ने सरेंडर किया CoR?
इन चारों कंपनियों ने अलग-अलग कारणों से NBFC के तौर पर कारोबार बंद करने का फैसला किया. कुछ ने बिजनेस बंद करने, कुछ ने विलय या समामेलन, और कुछ ने सर्वेक्षण या हड़ताल जैसे कारणों से लाइसेंस लौटाया. RBI के पास सरेंडर करने के बाद इन्हें औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया.
RBI की सख्ती का बड़ा संकेत
RBI की यह कार्रवाई इस ओर संकेत करती है कि वित्तीय कंपनियों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है. जो कंपनियां नियामकीय ढांचे के अनुरूप कार्य नहीं करतीं. उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने से लेकर वित्तीय दंड तक की कार्रवाई हो सकती है. इस कदम से एनबीएफसी सेक्टर में पारदर्शिता और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह
RBI की इस कार्रवाई के बाद यह जरूरी हो जाता है कि उपभोक्ता या निवेशक किसी भी वित्तीय संस्था में लेनदेन करने से पहले यह जांच लें कि वह पंजीकृत और मान्यता प्राप्त है या नहीं. कई बार फर्जी या अनियमित कंपनियां आम लोगों को लुभावनी योजनाओं में फंसाती हैं, जिससे बचने के लिए RBI समय-समय पर निगरानी और कार्रवाई करता है.