राशन डिपो होल्डर पर हुई सख्त कार्रवाई, विभाग ने लाइसेंस किया रद्द Ration Depot Action

Ration Depot Action: हरियाणा के हथीन क्षेत्र में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एक अहम कदम उठाते हुए रीण्डका गांव के राशन डिपो धारक गजेंद्र का लाइसेंस रद्द कर दिया है। यही नहीं, विभाग ने डिपो होल्डर द्वारा जमा की गई सिक्योरिटी राशि को भी जब्त कर लिया है। यह जानकारी जिला समाधान शिविर के दौरान जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सौरव द्वारा दी गई।

शिकायत के बाद सामने आई गड़बड़ी

शिकायतकर्ता नरवीर ने अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) जयदीप कुमार को शिकायत देते हुए बताया कि गजेंद्र द्वारा राशन डिपो संचालन में गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही थीं। लेकिन इसके बावजूद, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अब तक कोई केस थाने में दर्ज नहीं कराया है। इस पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता ने कार्रवाई में देरी को लेकर नाराजगी जताई।

खाद्य मंत्री को भेजी गई लिखित शिकायत

नरवीर ने मामले को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर को भी लिखित शिकायत भेजी। जिसमें उन्होंने विभागीय कार्रवाई की मांग की और कहा कि सिर्फ लाइसेंस रद्द करने से बात खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर कानूनी रूप से FIR दर्ज नहीं होती, तो यह अन्य डिपो धारकों को गलत संदेश दे सकता है।

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विभागीय कार्रवाई पर खड़े हो रहे सवाल

हालांकि डिपो लाइसेंस रद्द करना और सिक्योरिटी जब्त करना गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई है। लेकिन एफआईआर दर्ज न होने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग किसी प्रशासनिक दबाव या अंदरूनी राजनीति के चलते सख्त कार्रवाई से बच रहा है?

राशन प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कितनी अधिक जरूरत है। यदि डिपो धारक के खिलाफ गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है तो कानूनी कार्यवाही होना जरूरी है। ताकि आम जनता का भरोसा प्रणाली में बना रह सके।

समाधान शिविर में क्या हुआ?

जिला समाधान शिविर में जब यह मामला सामने आया। तब खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सौरव ने सार्वजनिक रूप से बताया कि डिपो का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और सिक्योरिटी जब्त कर ली गई है। यह जानकारी शिविर में मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों के सामने साझा की गई।

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अब आगे क्या?

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन या खाद्य विभाग FIR दर्ज कराएगा या नहीं। शिकायतकर्ता और ग्रामीणों की मांग है कि यदि अनियमितता साबित हो गई है, तो कानूनी कार्यवाही जरूरी है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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