Toll Plaza Free: भारतीय किसान यूनियन कादियां ने पंजाब में टोल प्लाजा पर गैर-पंजाबी कर्मचारियों की भर्ती के विरोध में बड़ा कदम उठाते हुए आज समराला के घुलाल टोल प्लाजा को फ्री कर दिया. यूनियन ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर बाहरी राज्यों से आए लोगों को नौकरी दी जा रही है, जिससे पंजाब के बेरोजगारों में रोष है.
28 हजार की जगह 14 हजार में भर्ती का आरोप
बीकेयू कादियां के जिला प्रधान हरदीप सिंह कादियां ने कहा कि टोल प्लाजा पर पंजाब के युवाओं को 28,000 रुपये वेतन पर नौकरी मिलनी चाहिए. लेकिन प्रबंधन कथित रूप से बाहरी राज्यों के लोगों को केवल 14,000 रुपये में रखकर 12-12 घंटे की शिफ्ट में काम करवा रहा है. उन्होंने इसे खुलेआम शोषण और भेदभाव करार दिया.
जब तक पंजाबियों को नौकरी नहीं, तब तक टोल वसूली नहीं
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक टोल प्लाजा पर पंजाबियों की नियुक्ति नहीं होती. तब तक यह धरना जारी रहेगा और कोई भी वाहन टोल नहीं देगा. किसानों ने टोल बैरियर के सामने धरना लगाकर वाहनों को बिना शुल्क के पार कराया.
टोल प्रबंधन की सफाई: पहले ही 28 कर्मचारी तैनात
टोल प्लाजा के मैनेजर यादविंदर सिंह ने यूनियन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही 28 कर्मचारियों की नियुक्ति की है. साथ ही बताया कि हर टोल प्लाजा पर 5 से 10 पंजाबी कर्मचारी नियुक्त होते हैं. उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से अतिरिक्त नियुक्तियों का दबाव पहली बार सामने आया है.
कंपनी को भेजी गई पूरी रिपोर्ट
प्रबंधन ने जानकारी दी है कि पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट कंपनी हेडक्वार्टर को भेज दी गई है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. लेकिन यदि जल्द हल नहीं निकला, तो टोल वसूली बंद रहने से सरकार और कंपनी दोनों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
स्थानीय बनाम बाहरी रोजगार का सवाल
यह विवाद स्थानीय बनाम बाहरी लोगों को मिलने वाली नौकरियों को लेकर खड़ा हुआ है. किसान यूनियन की मांग है कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए. खासकर तब जब रोजगार की भारी कमी और महंगाई का दौर चल रहा है.
क्या कहती है नीति?
हालांकि टोल प्लाजा प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों की भर्ती में कोई जातिगत या क्षेत्रीय भेदभाव नहीं किया जाता. लेकिन यह साफ है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी कम होने पर लोगों में असंतोष गहराता जा रहा है.