Mid Day Meal Workers: पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने केनरा बैंक के साथ मिलकर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कार्यरत 44,301 मिड-डे मील कुक-कम-हेल्पर्स के लिए एक विस्तृत बीमा योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत इन्हें 16 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर और वित्तीय सेवाओं में विशेष सुविधा दी जाएगी।
एमओयू पर हुआ हस्ताक्षर
गुरुवार को शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव अनिंदिता मित्रा (आईएएस) की उपस्थिति में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय (मिड-डे मील) और केनरा बैंक, चंडीगढ़ के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य इन कुक-कम-हेल्पर्स को आर्थिक सुरक्षा देना और बुनियादी बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।
बीमा योजना की प्रमुख विशेषताएं
इस बीमा योजना के अंतर्गत कुक-कम-हेल्पर्स को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
- प्राकृतिक मृत्यु पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर
- दुर्घटनाजन्य मृत्यु पर 16 लाख रुपये का बीमा कवर
- हवाई दुर्घटना से मृत्यु पर 18 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस
- बिना न्यूनतम बैलेंस के जीरो बैलेंस खाता सुविधा
- 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा या पिछले महीने के 50% सकल वेतन के बराबर ओवरड्राफ्ट का विकल्प
रसोइयों को मिलेगी सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस मौके पर कहा कि मिड-डे मील स्कीम के तहत काम करने वाले कुक्स राज्य के शिक्षा ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस योजना से न केवल उन्हें आर्थिक संबल मिलेगा। बल्कि वे खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करेंगे।
केनरा बैंक की भागीदारी से मिलेगा वित्तीय लाभ
केनरा बैंक इस योजना में सहयोगी बैंक के रूप में भागीदार है। बैंक न केवल बीमा कवर प्रदान करेगा। बल्कि खाताधारकों को सुलभ बैंकिंग सुविधाएं, ओवरड्राफ्ट, और अन्य डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा। इससे कुक्स को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम
राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। क्योंकि मिड-डे मील में कार्यरत अधिकांश रसोइया महिलाएं हैं। उन्हें यह बीमा कवर देने से सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और भविष्य के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा।
वित्तीय समावेशन की मिसाल बनेगी यह योजना
जीरो बैलेंस खाते, ओवरड्राफ्ट की सुविधा और इंश्योरेंस कवर जैसी सेवाएं इस योजना को वित्तीय समावेशन का मजबूत उदाहरण बनाती हैं। इसके जरिए कम आय वर्ग के कर्मचारियों को भी वह सुविधा मिलेगी जो अब तक सिर्फ संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक सीमित थी।
सरकार के सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल
इस योजना से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के कल्याण के लिए भी गंभीर और सक्रिय है। यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।