Roadways Bus Chakka Jam: अगर आप जुलाई में पंजाब यात्रा की तैयारी कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. 9, 10 और 11 जुलाई 2025 को पंजाब में सरकारी बस सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. इसका मतलब है कि इन तीन दिनों के दौरान पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC की बसें नहीं चलेंगी. जिससे आम यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
क्यों हो रहा है तीन दिन का चक्का जाम?
इस तीन दिवसीय चक्का जाम की घोषणा पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन द्वारा की गई है. यूनियन के नेताओं कमल कुमार, बलविंदर सिंह राठ, रेशम सिंह गिल और शमशेर सिंह ढिल्लों ने सरकार पर लंबे समय से मांगें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार से कई दौर की बातचीत के बावजूद मांगों पर कोई समाधान नहीं निकला है.
30 जून को परिवहन निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो 30 जून 2025 को पंजाब राज्य परिवहन निदेशक कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अलावा 9 से 11 जुलाई तक पूरे राज्य में चक्का जाम कर दिया जाएगा और यूनियन ने यह भी ऐलान किया है कि यदि फिर भी मांगे नहीं मानी गईं, तो मुख्यमंत्री आवास के सामने स्थायी धरना शुरू किया जाएगा.
यात्रियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं
इन तीन दिनों के दौरान बस सेवाएं पूरी तरह बाधित रहेंगी. जिससे आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, ऑफिस जाने वालों और बाहर से आने-जाने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. चूंकि यह आंदोलन पूरे राज्य में होगा. इसलिए इसका असर पंजाब के सभी जिलों पर पड़ेगा. यात्रियों को सलाह दी जाती है कि 9, 10 और 11 जुलाई को यात्रा की योजना टाल दें या वैकल्पिक साधनों का प्रबंध पहले से कर लें.
क्या हैं यूनियन की मुख्य मांगें?
हालांकि यूनियन द्वारा मांगों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है. लेकिन सूत्रों के अनुसार उनकी मांगों में शामिल हैं:
- कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नियमितिकरण (permanent) की प्रक्रिया तेज करना
- वेतन विसंगतियों को दूर करना
- सुविधाएं और सुरक्षा की गारंटी
- लंबे समय से लंबित भत्तों और प्रमोशन की प्रक्रिया को लागू करना
पिछली बातचीतें रही विफल
यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार से कई बार बातचीत हुई. लेकिन हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला. यूनियन का आरोप है कि काम करने वाले हजारों संविदा कर्मचारी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति में काम कर रहे हैं. जिसे लेकर वर्षों से संघर्ष जारी है.
सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं
अब तक सरकार की तरफ से इस आंदोलन को लेकर कोई ठोस बयान या कदम सामने नहीं आया है. अगर 30 जून को होने वाला प्रदर्शन और 3 दिन का चक्का जाम सफल रहता है, तो यह सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बना सकता है. इसके अलावा इससे राज्य की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की कमजोरियों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.
लोगों से अपील
यूनियन की चेतावनी के बाद यह तय है कि 9 से 11 जुलाई तक यात्रा करने वाले लोगों को पूर्व तैयारी करनी होगी. यदि आप इन तारीखों में पंजाब आना-जाना चाहते हैं, तो वैकल्पिक ट्रैवल साधनों जैसे रेलवे, टैक्सी या प्राइवेट गाड़ी का उपयोग करें. यात्रा से पहले अपने शहर की रोडवेज या पनबस डिपो से संपर्क करके स्थिति की पुष्टि अवश्य करें.