Railway Station Closed: प्रयागराज के दयालपुर रेलवे स्टेशन की तस्वीर अब सिर्फ एक खंडहर बनकर रह गई है. स्थानीय ग्रामीणों की वर्षों पुरानी कोशिशें, जो स्टेशन को बचाने के लिए की गई थीं. अब असफल होती नजर आ रही हैं. स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव नहीं है और परिसर में वीरानी पसरी है.
कभी टिकट काउंटर, आज मवेशियों का बसेरा
दयालपुर रेलवे स्टेशन का हाल ऐसा हो चुका है कि जहां कभी टिकट काउंटर हुआ करता था. वहां अब मवेशी बैठते हैं. स्टेशन मास्टर का केबिन जर्जर स्थिति में है और स्टेशन के आसपास की इमारतें धीरे-धीरे खाली ढांचे में बदल चुकी हैं.
ट्रेनों का ठहराव न होना सबसे बड़ी वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन की दुर्दशा की सबसे बड़ी वजह ट्रेनों का ठहराव न होना है. कई ट्रेनें स्टेशन से गुजरती हैं. लेकिन कोई रुकती नहीं. एकमात्र ट्रेन, जो यहां रुकती है. वह प्रयागराज नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ की ओर जाती है, जो ग्रामीणों की जरूरतों के लिहाज से व्यर्थ है.
रेलवे की नीति ने भी तोड़ी उम्मीद
रेलवे की नीति के अनुसार यदि किसी स्टेशन से 50 से कम टिकटों की बिक्री होती है, तो उसे बंद करने की प्रक्रिया में डाल दिया जाता है. इसी नीति के चलते साल 2006 में दयालपुर स्टेशन बंद कर दिया गया था. हालांकि साल 2020 में ग्रामीणों की अपील पर स्टेशन को फिर से खोला गया.
गांववालों की अनोखी मुहिम: बिना यात्रा के टिकट खरीदना
दयालपुर के ग्रामीणों ने एक अनोखा और प्रेरणादायक प्रयास किया. उन्होंने स्टेशन को जीवित रखने के लिए हर दिन 60 से अधिक टिकट खुद के पैसों से खरीदे, भले ही वे यात्रा न करते हों. उनका उद्देश्य था कि स्टेशन की पहचान गांव से बनी रहे और स्थानीय रोजगार और संपर्क बना रहे.
रेलवे से नहीं मिला सहयोग, टूटी हिम्मत
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन ने पर्याप्त सहयोग नहीं किया. जब ट्रेनों का ठहराव नहीं बढ़ाया गया, तो धीरे-धीरे लोगों का उत्साह भी खत्म होने लगा. अब स्टेशन फिर उसी स्थिति में पहुंच चुका है. जहां से वह 2006 में बंद किया गया था.
70 साल पुराना स्टेशन अब बदहाली की ओर
दयालपुर रेलवे स्टेशन करीब 70 साल पुराना है और कभी इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण यात्री ठिकाना हुआ करता था. अब इसके भविष्य पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. अगर यही स्थिति रही, तो यह स्टेशन इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा.
ग्रामीणों की अपील फिर से ठहरें ट्रेनें
ग्रामीणों ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन से स्टेशन पर कुछ मुख्य ट्रेनों के ठहराव की मांग की है. उनका कहना है कि अगर ट्रेनों का ठहराव शुरू होता है, तो लोग खुद-ब-खुद टिकट खरीदेंगे और स्टेशन को फिर से सक्रिय बनाया जा सकता है.
क्या होगा अगला कदम?
अब देखने वाली बात होगी कि रेलवे इस मांग को गंभीरता से लेता है या नहीं. अगर स्टेशन की बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो दयालपुर शेष उत्तर प्रदेश के उन कई बंद हो चुके स्टेशनों की सूची में शामिल हो जाएगा. जिनका कभी सुनहरा अतीत रहा था.