New Rail Line: मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के रेलवे यात्री व मालवहन नेटवर्क को और अधिक तेज़ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों राज्यों के बीच 520 किलोमीटर लंबी नई हाई-स्पीड रेललाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू हो गया है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत 9,275 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसका फिजिबिलिटी सर्वे वर्तमान में चल रहा है.
हाई स्पीड ट्रैक से मिलेगा रफ्तार का नया आयाम
इस नई तीसरी रेल लाइन पर ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी, जो कि वर्तमान अधिकतम 110-120 किमी/घंटा की रफ्तार से कहीं अधिक है. इससे न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि यात्रियों को बेहतर ट्रैवल अनुभव भी मिलेगा.
बढ़ेगा रेल नेटवर्क का लोड कैपेसिटी
यह रेलमार्ग देश के अत्यंत व्यस्त दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर से जुड़ा है, जिस पर हर समय मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की भारी भीड़ रहती है. तीसरी लाइन के निर्माण से इस भीड़ में राहत मिलेगी और ट्रेनों की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) में इजाफा हो सकेगा.
औद्योगिक परिवहन को मिलेगी रफ्तार
यह रूट कोयला, सीमेंट, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के परिवहन का प्रमुख रास्ता है. अभी केवल दोहरी लाइन होने के कारण मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है. जिससे पैसेंजर ट्रेनें प्रभावित होती हैं. लेकिन तीसरी लाइन बनने के बाद माल और यात्री ट्रेनों—दोनों के संचालन में तेजी आएगी. इससे औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई ताकत मिलेगी.
बनेंगे 200 से अधिक ओवरब्रिज-अंडरब्रिज
इस 520 किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण के दौरान लगभग 200 ओवरब्रिज और अंडरब्रिज बनाए जाएंगे. इसका उद्देश्य रेल यातायात की निर्बाधता और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करना है.
इन रूट्स से गुजरेगा हाई-स्पीड ट्रैक
इस नई लाइन का प्रस्तावित मार्ग मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और कस्बों से होकर गुजरेगा. जिन स्थानों को इस परियोजना में शामिल किया गया है, वे हैं:
- इटारसी
- पिपारिया
- गाडरवारा
- करेली
- नरसिंहपुर
- श्रीधाम
- जबलपुर
- कटनी
- मैहर
- सतना
- मानिकपुर (उत्तर प्रदेश)
यह ट्रैक वाणिज्यिक और यात्री सुविधाओं की दृष्टि से दोनों ही राज्यों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी रिपोर्ट
पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल सर्वे का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसकी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को जल्द भेजी जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर परियोजना को आगे की स्वीकृति और बजट आवंटन मिलेगा.
क्या होगा यात्रियों को फायदा?
- ट्रेनें अधिक रफ्तार से चलेंगी, जिससे समय की बचत होगी.
- ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, जिससे अधिक लोगों को यात्रा का मौका मिलेगा.
- भीड़भाड़ कम होगी, यात्रा अधिक आरामदायक होगी.
- औद्योगिक क्षेत्रों को माल ढुलाई की तेज सुविधा मिलेगी.
रेलवे के भविष्य के लिए मील का पत्थर
यह परियोजना सिर्फ मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के लिए ही नहीं. बल्कि पूरे देश के रेल नेटवर्क के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है. इससे भारत का रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर विश्वस्तरीय बन सकेगा और मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और लॉजिस्टिक्स हब के विजन को बल मिलेगा.