Selfie Attendance Rules: मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (MPMKVVCL) ने फील्ड ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अब मैदानी कार्य में लगे जूनियर इंजीनियर (JE) और उनसे ऊपर के अधिकारी दिन में सिर्फ एक बार ही सेल्फी अटेंडेंस दर्ज करेंगे, पहले की तरह दो बार नहीं।
अटेंडेंस नियमों में बदलाव की वजह क्या है?
कंपनी ने इस फैसले के पीछे फील्ड अफसरों की व्यावहारिक परेशानियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके मुताबिक बिजली आपूर्ति की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां, रखरखाव और अधोसंरचना कार्यों के चलते अफसर लगातार मैदानी भ्रमण में रहते हैं, जिससे वे दो बार उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते। इसी के मद्देनजर अटेंडेंस पोर्टल 2.0 में यह छूट दी गई है।
किन विभागों के अधिकारियों को मिलेगी छूट?
नए आदेश के अनुसार ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O\&M), STM/STC, सतर्कता, BI सेल और सिविल विभागों में तैनात फील्ड अफसरों को यह सेल्फी उपस्थिति की छूट दी गई है। यानी इन विभागों के JE और उससे ऊपर के अफसर अब दिन में किसी भी सुविधाजनक समय पर एक बार उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।
कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों के लिए क्या नियम?
कॉर्पोरेट ऑफिस या केवल कार्यालयीन कार्य करने वाले अधिकारी पुराने नियमों के अनुसार ही दो बार हाजिरी दर्ज करेंगे। यह छूट सिर्फ फील्ड ड्यूटी कर रहे अफसरों तक सीमित रहेगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा कार्यालय में उपस्थित रहने की जिम्मेदारी से छूट नहीं देती।
3 महीने का पायलट प्रोजेक्ट
यह नई व्यवस्था 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है। कंपनी इस दौरान फील्ड गतिविधियों की प्रभावशीलता, रिपोर्टिंग अनुशासन और अधिकारियों की उपस्थिति की गुणवत्ता का मूल्यांकन करेगी। इसके आधार पर यह तय होगा कि आगे इसे स्थायी किया जाए या नहीं।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
बिजली विभाग की नॉन-स्टॉप सेवाओं और बढ़ती कार्य चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों की मैदानी उपस्थिति पर निर्भरता बढ़ गई है। ऐसे में बार-बार अटेंडेंस अपडेट करना उनके कार्य निष्पादन में बाधा बन रहा था। यह बदलाव फील्ड में अधिक समय देने और सेवा वितरण में सुधार लाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
क्या यह छूट सभी कर्मचारियों को मिलेगी?
नहीं यह छूट सिर्फ फील्ड ड्यूटी में लगे JE और उच्च पदस्थ अधिकारियों तक सीमित है। जिनका कार्य पूर्णतः कार्यालयीन है या जो मुख्यालय में पदस्थ हैं, उन्हें पहले की तरह दो बार हाजिरी लगानी होगी। कंपनी ने यह व्यवस्था विभागीय अनुशासन को बनाए रखते हुए, लचीलापन लाने के उद्देश्य से शुरू की है।
आगे क्या होगा?
तीन महीने की अवधि में यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य इकाइयों या पूरे विभाग में भी लागू किया जा सकता है। कार्मिक विभाग इस दौरान निगरानी रखेगा कि अधिकारी सुविधा का दुरुपयोग न करें और निर्धारित कार्यस्थल पर समय पर मौजूद रहें।