ट्रेन ड्राइवर की कितनी होती है सैलरी, सैलरी के साथ मिलती है ये खास सुविधाएं Loco Pilot Salary

Loco Pilot Salary: भारतीय रेलवे न केवल देश का बल्कि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. इसे सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए लाखों कर्मचारी काम करते हैं. जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लोको पायलट यानी ट्रेन ड्राइवर. क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन चलाने वाले इन ड्राइवरों की सैलरी कितनी होती है? और आठवां वेतन आयोग लागू होने के बाद ये सैलरी कितनी बढ़ेगी? आइए आज हम में जानते हैं लोको पायलट से जुड़ी पूरी जानकारी.

लोको पायलट की भर्ती प्रक्रिया

रेलवे में सीधे लोको पायलट की नियुक्ति नहीं होती. सबसे पहले उम्मीदवार को असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर नियुक्त किया जाता है. इसके बाद उसे कठोर ट्रेनिंग से गुजरना होता है. ट्रेनिंग पूरी करने और अनुभव प्राप्त करने के बाद ही उम्मीदवार को पूरी तरह ट्रेन चलाने की अनुमति मिलती है.

लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवार के पास 10वीं पास सर्टिफिकेट होना चाहिए और किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई या इंजीनियरिंग डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, ऑटोमोबाइल) में होना अनिवार्य है. इसके साथ ही उम्मीदवार की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि आरक्षित वर्ग को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलती है.

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लोको पायलट की शुरुआती और अनुभवी सैलरी

रेलवे में काम करने वाले लोको पायलटों को केंद्र सरकार के वेतनमान के अनुसार वेतन मिलता है.

  • असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की प्रारंभिक सैलरी 19,900 रुपये (लेवल-2) होती है. विभिन्न भत्तों को जोड़ने के बाद यह 30,000 से 35,000 रुपये तक पहुंच सकती है.
  • सीनियर लोको पायलट की सैलरी 35,000 से 55,000 रुपये के बीच होती है.
  • जबकि मुख्य लोको पायलट (Chief Loco Pilot) की सैलरी 60,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है.

8वें वेतन आयोग के बाद कितनी बढ़ेगी सैलरी?

सरकार द्वारा प्रस्तावित आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) 2026 के आस-पास लागू हो सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लोको पायलट की सैलरी में 20 से 25 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है.

  • ALP की सैलरी बढ़कर करीब 25,000 रुपये हो सकती है.
  • वहीं अनुभवी लोको पायलट की सैलरी 70,000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है.

ओवरटाइम से दोगुनी सैलरी भी मिलती है

रेलवे ड्राइवरों को मिलने वाला वेतन केवल मूल सैलरी तक सीमित नहीं होता. उन्हें ओवर टाइम का भी अलग से भुगतान किया जाता है.

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  • कई बार ट्रेनें लेट हो जाती हैं या आउटर पर खड़ी रहती हैं, जिससे लोको पायलटों को अतिरिक्त समय तक ड्यूटी देनी पड़ती है.
  • ऐसे मामलों में उन्हें ओवरटाइम की दर पर भुगतान किया जाता है.
  • एक रिपोर्ट के मुताबिक कई बार तो लोको पायलट की सैलरी ओवरटाइम के कारण दोगुनी तक हो जाती है.

क्या ट्रेन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए?

  • गाड़ियों या विमानों की तरह ट्रेन चलाने के लिए कोई सामान्य ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं होती.
  • इस टेस्ट को पास करने के बाद उन्हें कंपेटेंसी सर्टिफिकेट मिलता है, जो ट्रेन चलाने के लिए अनिवार्य होता है.
  • ट्रेन चलाने के लिए रेलवे अपने स्तर पर भर्ती और ट्रेनिंग कराता है.
  • प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवार को डिविजनल मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियर द्वारा आयोजित एक योग्यता परीक्षा (Competency Test) पास करनी होती है.

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