धरती के नीचे कैसे बिछाई जाती है अंडरग्राउंड सुरंग, इस हाईटेक तकनीक का होता है इस्तेमाल Underground Metro Construction

Underground Metro Construction: भारत के कई बड़े शहरों में मेट्रो ट्रेनें आज यात्रा का सबसे तेज़, सुरक्षित और किफायती माध्यम बन चुकी हैं. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है. खास बात यह है कि ये मेट्रो लाइनों में से कई जमीन के ऊपर एलिवेटेड हैं, जबकि कई लाइनें जमीन के काफी नीचे सुरंगों के माध्यम से बिछाई गई हैं.

जमीन के नीचे दौड़ती है मेट्रो

अगर आपने कभी मेट्रो में यात्रा की है, तो यह जरूर सोचा होगा कि जमीन के कई मीटर नीचे मेट्रो ट्रेन कैसे और किन तकनीकों से चलाई जाती है. सुरंग कैसे बनाई जाती है, और इतनी गहराई पर मशीनें कैसे काम करती हैं—यह जानना अपने आप में काफी रोचक है.

कैसे बनाई जाती है अंडरग्राउंड मेट्रो की सुरंग

जमीन के नीचे मेट्रो लाइन बिछाने के लिए दो प्रमुख तकनीकों का उपयोग किया जाता है: कट एंड कवर (Cut and Cover) और टनल बोरिंग मशीन (TBM). इन तकनीकों के जरिए शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी बिना सतह पर ज़्यादा तोड़फोड़ किए सुरंग बनाई जाती है.

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क्या होती है कट एंड कवर तकनीक?

कट एंड कवर तकनीक में पहले जमीन को ऊपर से खोदा जाता है, फिर वहां पर सुरंग बनाई जाती है और अंत में उसे दोबारा ढंक दिया जाता है. यह तकनीक तब इस्तेमाल होती है जब सतह पर काम करने की पर्याप्त जगह हो और यातायात को डायवर्ट किया जा सके.

टनल बोरिंग मशीन: सुरंग बनाने की आधुनिक तकनीक

टनल बोरिंग मशीन (TBM) एक विशालकाय यंत्र होता है, जो गहरे भूमिगत जाकर सुरंग की खुदाई करता है. यह मशीन न सिर्फ खुदाई करती है बल्कि सुरंग की दीवारों को मजबूत करने का काम भी साथ-साथ करती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि खुदाई के दौरान सतह पर मौजूद इमारतों और संरचनाओं को नुकसान न पहुंचे.

जमीन के नीचे कैसे चलती है TBM मशीन

टनल बोरिंग मशीन पूरी तरह से जमीन के नीचे कार्य करती है. यह धीरे-धीरे जमीन को काटती जाती है और खुदाई के साथ-साथ टनल की आउटलाइन भी तैयार करती जाती है. मशीन की दिशा और गहराई को अत्यंत सटीकता से नियंत्रित किया जाता है ताकि कोई रुकावट न आए और मार्ग एकदम सीधा बने.

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कितनी बड़ी होती है टनल बोरिंग मशीन?

दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होने वाली टनल बोरिंग मशीन की लंबाई 103.9 मीटर होती है, जो किसी फुटबॉल के मैदान से भी ज्यादा लंबी होती है. इसका व्यास इतना बड़ा होता है कि एक पूरी ट्रेन सुरंग से आसानी से गुजर सके. यह मशीन पूरी तरह से बंद होती है और अंदर बैठे इंजीनियर और तकनीशियन कंप्यूटर की मदद से संचालन करते हैं.

TBM से मिलती है सटीक और सुरक्षित खुदाई

मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, “TBM से तरह-तरह की मिट्टी और पत्थरों के बीच सर्कुलर क्रॉस-सेक्शन में खुदाई की जा सकती है. इसने दुनिया भर में टनल निर्माण के तरीके में क्रांति ला दी है. अब सतह पर मौजूद इमारतों और अन्य संरचनाओं को डिस्टर्ब किए बिना भी सुरंग बनाई जा सकती है.”

टनल बोरिंग मशीन की खासियतें

  • मजबूत संरचना: TBM में स्टील और हाई-ग्रेड मटेरियल का इस्तेमाल होता है.
  • ऑटोमेटिक सिस्टम: खुदाई, स्लैब निर्माण, और मलबा निकालने की प्रक्रिया ऑटोमेटिक होती है.
  • न्यूनतम कंपन: मशीन इस तरह से डिजाइन की जाती है कि खुदाई करते समय बहुत कम कंपन उत्पन्न होता है, जिससे सतह की संरचनाएं सुरक्षित रहती हैं.
  • सटीक मार्ग: GPS और अन्य सेंसर की मदद से मशीन को सेंटीमीटर स्तर पर नियंत्रित किया जाता है.

कितने किलोमीटर सुरंग बना सकती है एक TBM?

एक टनल बोरिंग मशीन आमतौर पर हर दिन लगभग 10 से 15 मीटर की खुदाई कर सकती है. इसका मतलब है कि महीने भर में 300 से 450 मीटर सुरंग बनाई जा सकती है. यदि एक साथ कई TBM लगाए जाएं, तो यह गति और भी तेज हो सकती है.

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क्यों जरूरी है टनल तकनीक बड़े शहरों में

बड़े शहरों में जमीन की सतह पर जगह की कमी होती है और सड़क यातायात पहले से ही बहुत व्यस्त रहता है. ऐसे में टनल के जरिए मेट्रो लाइन बिछाना ही सबसे उपयुक्त विकल्प होता है. इससे न तो सतह पर ज्यादा काम करना पड़ता है और न ही ट्रैफिक प्रभावित होता है.

भारत में कहां-कहां हो रहा है TBM का इस्तेमाल

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में TBM तकनीक का उपयोग हो रहा है. दिल्ली मेट्रो ने तो TBM के उपयोग से अत्यधिक जटिल क्षेत्रों में भी सफल खुदाई करके सुरंग बनाई है, जैसे चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस और ओल्ड दिल्ली जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके.

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