Electricity Prepaid Meter: हिमाचल प्रदेश में अब बिजली उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना होगा और फिर बिजली का उपयोग करना होगा. राज्य बिजली बोर्ड ने स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, और इसकी शुरुआत अगले साल से प्रदेशभर में की जाएगी.
स्मार्ट मीटर से बिजली का होगा प्रीपेड सिस्टम
राज्य में अब तक पारंपरिक तरीके से बिजली के बिल बाद में भेजे जाते थे. लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के लिए पहले भुगतान करना अनिवार्य हो जाएगा. यह पूरी तरह प्रीपेड प्रणाली होगी. जैसे आप मोबाइल रिचार्ज कर उपयोग करते हैं.
रिचार्ज खत्म, तो बिजली बंद
इस व्यवस्था में जैसे ही रिचार्ज की गई राशि खत्म होगी. उपभोक्ता के घर की बिजली अपने आप कट जाएगी. हालांकि चार्ज खत्म होने से पांच दिन पहले ही उपभोक्ता को अलर्ट भेज दिया जाएगा. यह अलर्ट SMS और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मिलेगा.
बिजली बोर्ड को होगा सीधा फायदा
राज्य बिजली बोर्ड का कहना है कि इससे लंबित बिलों की समस्या खत्म हो जाएगी. चूंकि उपभोक्ता पहले से रिचार्ज करेंगे. इसलिए बिजली बोर्ड को पहले ही राजस्व प्राप्त हो जाएगा, जिससे वित्तीय स्थिति भी सुधरेगी.
उपभोक्ताओं को मिलेगा मासिक बजट का लाभ
बिजली बोर्ड के अध्यक्ष संजय गुप्ता के अनुसार यह नया सिस्टम ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगा. यदि कोई उपभोक्ता महीने में ₹500 की बिजली उपयोग करना चाहता है, तो वह उतने ही रुपए का रिचार्ज कर सकेगा. इससे लोगों को अपने बजट के अनुसार बिजली की खपत को नियंत्रित करने का विकल्प मिलेगा.
पूरे प्रदेश में बदले जाएंगे पुराने मीटर
राज्य बिजली बोर्ड ने बताया कि प्रदेशभर में पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. नई व्यवस्था को तेजी से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
कैसे करेगा काम स्मार्ट मीटर सिस्टम?
- प्रीपेड सिस्टम की तरह रिचार्ज करिए
- मोबाइल ऐप, वेबसाइट या नजदीकी केंद्र से रिचार्ज संभव
- रिचार्ज की स्थिति की रियल टाइम निगरानी मिलेगी
- रिचार्ज खत्म होने पर SMS और मोबाइल अलर्ट मिलेगा
- बजट के अनुसार बिजली खपत करने की सुविधा
स्मार्ट मीटर से जुड़ी संभावनाएं और चुनौतियां
जहां एक ओर स्मार्ट मीटर से राजस्व वसूली में पारदर्शिता आएगी. वहीं दूसरी ओर इसके रूरल एरिया में इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी जानकारी और अवेयरनेस जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. इसके लिए बिजली बोर्ड को जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत होगी.