HImachal Plastic Ban : हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्लास्टिक और ठोस कचरे की समस्या से निपटने के लिए एक नया चालान एक्ट लाने की घोषणा की है। राज्य के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने जानकारी दी कि यह कानून ऐसा बनाया जाएगा जिससे चालान की प्रक्रिया आसान और प्रभावी हो। उन्होंने बताया कि यह निर्णय राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।
जिम्मेदारी तय होगी, कार्रवाई भी होगी
कार्यक्रम में बोलते हुए प्रबोध सक्सेना ने बताया कि प्लास्टिक उत्पन्न करने वालों और प्रदूषण फैलाने वालों की अब जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार का उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि उनके सख्त पालन को भी सुनिश्चित करना है। इस दिशा में प्लास्टिक के उत्पादकों को भी नियमित निगरानी और नियंत्रण के दायरे में लाया जाएगा।
राज्य के हर जिले में खोले जाएंगे पर्यावरण कार्यालय
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि हर जिले में पर्यावरण कार्यालय स्थापित किए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर निगरानी, कार्रवाई और जागरूकता अभियानों का संचालन करेंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े निर्णयों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी।
पॉलीथिन पर पहले ही लगाया गया है प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य था जिसने रंगीन पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद सभी प्रकार की पॉलीथिन पर भी रोक लगा दी गई। अब सरकार ने बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पर भी बैन लगा दिया है, क्योंकि यह प्लास्टिक 35 डिग्री से अधिक तापमान पर ही डिकंपोज होता है, जो हिमाचल के मौसम में नहीं हो पाता।
पर्यावरण मित्र बन रहा है हिमाचल
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में पहले से ही प्लास्टिक बोतलों पर प्रतिबंध, टैक्सियों और बसों में डस्टबिन लगाने के निर्देश, और सरकारी आयोजनों में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक जैसे निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री पहले ही हिमाचल को ग्रीन स्टेट घोषित कर चुके हैं और सरकार अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
डिपोजिट रिफंड स्कीम और मॉनिटरिंग मैकेनिज्म
सरकार जल्द ही डिपोजिट रिफंड स्कीम भी लागू करेगी, जिसमें प्लास्टिक उत्पादों पर जमा की गई राशि वापसी के रूप में दी जाएगी, ताकि नागरिक रीसाइक्लिंग में भागीदारी बढ़ाएं। साथ ही एक निगरानी समिति का गठन किया जाएगा जो प्लास्टिक उत्पन्न करने वाले व प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर नियंत्रण रखेगी।
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पर भी प्रतिबंध क्यों?
मुख्य सचिव ने बताया कि हिमाचल का तापमान कभी भी 35 डिग्री से अधिक नहीं जाता, इसलिए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक भी यहां पूरी तरह विघटित नहीं हो पाता। इसी कारण इस पर भी प्रतिबंध जरूरी था। यह प्रतिबंध सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि राज्य की स्थायी विकास नीति का भी हिस्सा है।
निजी कंपनियों की भागीदारी
सरकारी प्रयासों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभा रही हैं। समारोह में उपस्थित बिरला टेक्सटाइल मिल, बद्दी के रोहित अरोड़ा ने बताया कि उनकी कंपनी रीसाइकल्ड प्लास्टिक और फाइबर पर काम कर रही है। इसके लिए प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर बड़ोग में 1 करोड़ रुपये निवेश किया जा रहा है।
नेस्ले इंडिया खर्च करेगा 3 करोड़ रुपये
नेस्ले इंडिया के वैभव पटेल ने बताया कि उनकी कंपनी 2019 से ही हिमाचल सरकार को सहयोग कर रही है और अब अगले चरण में 3 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। यह निवेश प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, रीसाइक्लिंग सुविधाओं के विकास और जागरूकता अभियानों में किया जाएगा।