School Bagless Day: गुजरात सरकार ने प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। अब राज्य के कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों को हर शनिवार स्कूल बैग लेकर नहीं आना होगा। सरकार के इस फैसले को ‘बगलेस डे’ यानी बिना बैग का दिन नाम दिया गया है। यह निर्णय राज्य के सभी सरकारी और अनुदानित स्कूलों में लागू किया गया है।
पढ़ाई नहीं, एक्टिविटी पर फोकस रहेगा
शनिवार को अब बच्चों की पढ़ाई की जगह फिजिकल और रचनात्मक गतिविधियों पर जोर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इन गतिविधियों में योग, मास ड्रिल, खेलकूद, म्यूजिक, पेंटिंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रोजेक्ट वर्क और स्थानीय पर्यटन जैसी चीज़ें शामिल होंगी। इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।
बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को मिलेगी दिशा
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने इस फैसले को बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए लिया है। डिजिटल युग में मोबाइल और स्क्रीन टाइम के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों में एकाग्रता, रचनात्मकता और शारीरिक फुर्ती में कमी देखी जा रही है। ऐसे में बगलेस डे बच्चों के लिए राहत और मनोरंजन दोनों लेकर आएगा।
मोटापे और तनाव से मुक्ति दिलाएगी यह पहल
फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा देने का एक और मकसद बच्चों में मोटापे और तनाव को कम करना है। खासकर योग और मास ड्रिल जैसी गतिविधियाँ बच्चों को फिट रखने में मदद करेंगी। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि शनिवार को खेल और क्रिएटिव एक्टिविटी का माहौल बच्चों के लिए सहज और आनंददायक हो।
एक दिन पढ़ाई से ब्रेक, मस्ती और सीख का मेल
‘आनंददायी शनिवार’ नाम से इस योजना को ब्रांड किया गया है। जिसमें बच्चों को पढ़ाई से ब्रेक मिलेगा और वे खुश होकर स्कूल आएंगे। इस कार्यक्रम के तहत हर स्कूल में एक विशेष प्रशिक्षित शिक्षक को नियुक्त किया जाएगा, जो इन गतिविधियों का संचालन करेगा। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल भी सिखाया जाए।
उत्तराखंड ने भी किया था ऐसा प्रयोग
गुजरात से पहले उत्तराखंड सरकार ने भी इसी प्रकार की पहल की थी। अप्रैल 2025 में जारी आदेश के अनुसार हर महीने के अंतिम शनिवार को सरकारी और निजी स्कूलों में बैगलेस डे मनाया जाता है। इस दिन बच्चों को किताबें नहीं लानी होतीं। बल्कि विभिन्न गतिविधियों और सामूहिक प्रयोगों में हिस्सा लेने का अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का है यह हिस्सा
बगलेस डे को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया गया है। इस नीति का मकसद केवल अकादमिक जानकारी तक सीमित न रहकर बच्चों की सोच, रचनात्मकता और कौशल विकास को प्रोत्साहित करना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि सप्ताह में एक दिन बगैर बस्ते के स्कूल से बच्चों में सीखने का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अभिभावकों को भी मिलेगी राहत
इस फैसले से अभिभावकों पर भी बैग और किताबों की तैयारी का बोझ कम होगा। साथ ही बच्चों के लिए स्कूल जाने का अनुभव ज्यादा उत्साहित और तनावमुक्त बन सकेगा। अभिभावकों को यह भी सुझाव दिया गया है कि वे बगलेस डे पर बच्चों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करें।