3 दिन स्कूल नही पहुंचे तो घर आएगी बुलावा टोली, 1 जुलाई से शिक्षा में बड़ा बदलाव Education System

Education System : गाजियाबाद जिले के 446 परिषदीय स्कूलों में बच्चों के नामांकन को बढ़ावा देने और उपस्थित‍ि सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई रणनीति बनाई है। इसके तहत ‘स्कूल चलो अभियान’ का दूसरा चरण 1 जुलाई 2025 से शुरू होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है।

‘स्कूल चलो अभियान’ की नई रणनीति

स्कूल चलो अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक और स्वयं छात्र गांव-गांव जाकर अभिभावकों से संपर्क करेंगे। उन्हें परिषदीय स्कूलों की सुविधाओं, शैक्षणिक गुणवत्ता और विकास कार्यक्रमों की जानकारी देंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और परिषदीय स्कूलों में नामांकन की दर में निरंतर वृद्धि हो।

शिक्षकों की जिम्मेदारी और प्रशिक्षण

बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदान करता है ताकि वे छात्रों और अभिभावकों से प्रभावी संवाद स्थापित कर सकें। इस अभियान में शिक्षकों को गांव के स्तर पर मुख्य प्रेरक की भूमिका में रखा गया है। शिक्षक अभिभावकों को यह समझाएंगे कि परिषदीय स्कूलों में उनके बच्चों को निःशुल्क पाठ्य सामग्री, पोषण युक्त मध्याह्न भोजन, यूनिफॉर्म, और सहायक गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएं मिलती हैं।

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छात्रों की उपस्थिति के लिए ‘बुलावा टोली’

अभियान का दूसरा अहम पहलू बच्चों की स्कूल उपस्थिति को सुनिश्चित करना है। यदि कोई छात्र लगातार तीन दिन स्कूल नहीं आता, तो विभाग द्वारा गठित ‘छात्रों की बुलावा टोली’ संबंधित छात्र के घर जाकर उनसे बातचीत करेगी। अगर छुट्टी बिना किसी उचित कारण के ली जा रही है, तो बुलावा टोली बच्चे को समझाकर स्कूल आने के लिए प्रेरित करेगी।

बुलावा टोली के बाद शिक्षकों की सीधी पहल

यदि बुलावा टोली के प्रयासों के बावजूद छात्र स्कूल नहीं आता, तो उस स्थिति में स्कूल के शिक्षक स्वयं छात्र के घर पहुंचकर अभिभावकों से मिलेंगे। शिक्षक यह भी बताएंगे कि छुट्टी के कारण जो पढ़ाई छूट गई है, वह ‘रिमेडियल क्लासेस’ के माध्यम से पूरी करवाई जाएगी। इस पहल का मकसद बच्चों को स्कूल से जोड़कर पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखना है।

गाजियाबाद में ऑपरेशन कायाकल्प की प्रगति

गाजियाबाद में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत परिषदीय स्कूलों की भौतिक और शैक्षणिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है। स्कूलों में केवल पठन-पाठन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सहगामी गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कई विद्यालयों में ‘पोषण वाटिका’ बनाई गई है, जहां छात्र ऑर्गेनिक तरीके से सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

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पोषण वाटिका: स्वावलंबन और पोषण की पहल

इन पोषण वाटिकाओं में उगाई गई सब्जियों का उपयोग मिड डे मील में किया जा रहा है, जिससे बच्चों को स्वस्थ और ताजगीपूर्ण भोजन मिल रहा है। साथ ही छात्रों को कृषि और स्वावलंबन के मूल्यों की भी शिक्षा दी जा रही है। इस नवाचार से बच्चों में रुचि, जिम्मेदारी और भागीदारी की भावना उत्पन्न हो रही है।

अभियान में छात्रों की भी अहम भूमिका

इस बार की खास बात यह है कि विद्यालयों के छात्र भी ‘स्कूल चलो अभियान’ के राजदूत बनेंगे। वे अपने गांव और मोहल्ले में जाकर अन्य बच्चों के अभिभावकों को समझाएंगे कि उनके स्कूल में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह पहल बच्चों को भी नेतृत्व और संवाद कौशल सिखाएगी।

बेसिक शिक्षा विभाग की व्यापक तैयारी

बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव के अनुसार, 1 जुलाई से शुरू हो रहे दूसरे चरण के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। विभाग का उद्देश्य है कि गाजियाबाद के किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रखा जाए। उन्होंने सभी शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अभियान को जागरूकता और संवेदनशीलता के साथ चलाया जाए।

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शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक भागीदारी की आवश्यकता

सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उसमें समाज की सक्रिय भागीदारी हो। अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चा स्कूल जाए और नियमित रूप से पढ़ाई करे। ‘स्कूल चलो अभियान’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि शिक्षा को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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