हर महीने 4 दिन गांवों में बिताएंगे शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री ने किया बड़ा ऐलान Education Policy

Education Policy: राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को परखने और सुधारने के लिए राज्य सरकार ने अब कड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के सभागार में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत बजट वर्ष 2024-25 की क्रियान्विति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में विभाग की योजनाओं की प्रगति का आंकलन करते हुए कई महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिए गए.

अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में अनिवार्य ठहराव के निर्देश

बैठक में सबसे अहम निर्देश यह रहा कि अब शिक्षा विभाग के अधिकारी हर महीने कम से कम चार दिन ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से ठहरेंगे. शिक्षा मंत्री ने कहा कि फील्ड विजिट के बिना योजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझना संभव नहीं है और यदि अधिकारी खुद मौके पर जाकर हालात नहीं देखेंगे. तो योजनाओं का सही क्रियान्वयन असंभव है.

“अधिकारियों को गांव में रुककर स्कूलों की हालत, शिक्षक उपस्थिति, छात्रों की स्थिति और योजनाओं के असर को प्रत्यक्ष रूप से देखना चाहिए,” — मदन दिलावर

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फील्ड विजिट का पूरा खर्च सरकार उठाएगी

शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों को फील्ड विजिट में किसी प्रकार की वित्तीय परेशानी न हो. इसके लिए सरकार उनके आवागमन और ठहराव का पूरा खर्च वहन करेगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि हर फील्ड विजिट की रिपोर्ट समय पर संबंधित उच्च अधिकारियों को सौंपनी होगी.

निर्माण कार्यों में कोताही पर होगी कड़ी कार्रवाई

शिक्षा मंत्री ने समीक्षा के दौरान यह भी पाया कि कई जगहों पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं. उन्होंने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि:

  • किसी भी निर्माण कार्य में घटिया सामग्री या लापरवाही नहीं चलेगी.
  • ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारी की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
  • यदि कोई ठेकेदार या निर्माण एजेंसी दोषी पाई जाती है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और न्यायिक कार्रवाई भी संभव है.

लंबित कार्यों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई योजनाएं और निर्माण कार्य अब भी लंबित पड़े हैं. जिससे स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है. शिक्षा मंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से कहा कि:

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  • हर लंबित प्रोजेक्ट की स्टेटस रिपोर्ट बनाई जाए.
  • जो कार्य समय पर पूरे नहीं हुए हैं, उनकी विशेष समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए.
  • आगे की सभी मंजूरी और व्यय विवरण टाइमलाइन के अनुसार अपडेट किए जाएं.

विद्यार्थियों के समग्र विकास पर रहेगा फोकस

बैठक का मुख्य उद्देश्य था कि राज्य के छात्र न केवल शिक्षा के मामले में आगे बढ़ें. बल्कि उनका समग्र विकास भी सुनिश्चित किया जाए. इसके लिए शिक्षा मंत्री ने कहा:

  • पंचायत स्तर पर ठहराव से अधिकारी मूलभूत समस्याओं की पहचान कर सकेंगे.
  • योजनाओं के सही क्रियान्वयन से ही छात्रों को समय पर सुविधाएं और संसाधन मिल पाएंगे.
  • प्रत्येक ब्लॉक में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाएगी.

बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के कई शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:

  • विशिष्ट शासन सचिव – विश्वमोहन शर्मा
  • राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त – अनुपमा जोरवाल
  • निदेशक माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा – सीताराम जाट
  • संयुक्त शासन सचिव – मनीष गोयल
  • अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक – सुरेश कुमार बुनकर
  • विशेषाधिकारी – सतीश गुप्ता

इन अधिकारियों ने विभाग की विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति, बजट उपयोग और भविष्य की रणनीति पर प्रस्तुति दी.

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पंचायत स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा मंत्री द्वारा दिया गया यह निर्देश कि हर अधिकारी हर महीने पंचायतों में चार दिन अनिवार्य रूप से ठहरे, यह दर्शाता है कि अब सरकार कागज़ी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीनी सच्चाई जानने के लिए गंभीर है. यह निर्णय खासतौर पर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का कार्य करेगा.

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