बिजली चोरी करने वालों पर विभाग सख्त, अब हर यूनिट का लिया जाएगा हिसाब Electricity Theft

Electricity Theft: बिजली चोरी रोकने के लिए UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) अब ट्रांसफार्मर से लेकर तारों तक की पूरी व्यवस्था को आधुनिक बना रहा है. ट्रांसफार्मर पर डिस्ट्रीब्यूशन मीटर लगाए जा रहे हैं. जिससे यह रिकॉर्ड किया जा सके कि किस ट्रांसफार्मर से कितनी यूनिट बिजली दी गई और उसमें से कितनी बिजली उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग में लाई गई. इससे फुंकी गई बिजली की यूनिटों का अंतर पकड़ में आ जाएगा.

बिजली की खपत और चोरी दोनों पर होगी नजर

ट्रांसफार्मर पर लगे ये स्मार्ट मीटर उन मामलों को पकड़ने में मदद करेंगे जहां मीटर्ड उपभोक्ता तय सीमा से अधिक बिजली की खपत कर रहे हैं. ऐसे मामलों में बिजली चोरी की संभावना मानी जाएगी. जिले में लगभग 3,700 ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है. जिसमें अब तक करीब 500 मीटर ही लगाए जा सके हैं.

UPPCL के पास कितना बड़ा नेटवर्क?

जिले में 7.26 लाख उपभोक्ता हैं. जिन्हें 50 हजार से अधिक ट्रांसफार्मरों के माध्यम से बिजली दी जाती है. 127 बिजलीघरों में 5 MVA, 8 MVA और 10 MVA के पावर ट्रांसफार्मर हैं. इसके अलावा 25, 63, 100, 250, 400 और 630 KVA के ट्रांसफार्मर भी उपयोग में लिए जा रहे हैं.

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नए मीटर से क्या फायदे होंगे?

डिस्ट्रीब्यूशन मीटर से मिलने वाले फायदे:

  • ऊर्जा प्रबंधन में सुधार
  • लाइन लॉस की निगरानी
  • बिजली चोरी की पहचान
  • ओवरलोडिंग का पता लगना
  • कनेक्शन डेटा और ट्रांसफार्मर की क्षमता की निगरानी

केबलों में भी लाया गया बदलाव, अब काटना आसान नहीं

बिजली चोरी तारों को काटकर या बायपास करके की जाती रही है. इसे रोकने के लिए अब विभाग ने बंच केबल की जगह एसी (Armoured Conductor) केबल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ये केबलें अलग-अलग और मजबूत होती हैं. जिन्हें काटना या छेदना मुश्किल है.

मीटर तक जाने वाली केबल में भी सख्ती

मीटर तक खंभे से जाने वाली केबल को भी अब आर्मर्ड केबल से बदला जा रहा है. इसमें पीवीसी लेयर के अलावा लोहे की परत होती है. जिससे यह कटिंग या टैपिंग के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है. बिना मीटर के सीधे तार जोड़ने या मीटर बायपास करने की छूट अब उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगी.

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बिजली चोरी पर लगाम की नई रणनीति

UPPCL अब मशीनों की मदद से निगरानी, प्रौद्योगिकी से ट्रैकिंग और सुरक्षा केबलिंग के जरिए ऐसे उपभोक्ताओं को चिह्नित करेगा जो बिना मीटर या बायपास करके बिजली का दुरुपयोग कर रहे हैं. इस पूरी रणनीति का मकसद है कि बिजली की हर यूनिट का हिसाब रखा जा सके और अनाधिकृत खपत पर कठोर कार्रवाई हो.

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