Traffic Challan Rules : गर्मियों में जब सूरज सिर पर होता है, तब कार के अंदर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ जाता है। इस परेशानी से बचने के लिए कई लोग कार की खिड़कियों पर टिंटेड ग्लास या काली फिल्म लगवाते हैं। इससे कार का इंटीरियर गर्म नहीं होता और AC पर दबाव भी कम पड़ता है। लेकिन अगर यह नियम के अनुसार नहीं किया गया, तो पुलिस भारी चालान काट सकती है।
क्या होते हैं टिंटेड ग्लास?
टिंटेड ग्लास वे शीशे होते हैं जिन पर एक विशेष प्रकार की गहरे रंग की परत (फिल्म) चढ़ाई जाती है। इसका उद्देश्य है कार के अंदर आने वाली धूप की मात्रा को कम करना और बाहरी लोगों की नजर से कार के अंदर के दृश्य को छुपाना। यह फिल्म काले, भूरे या नीले रंग में हो सकती है और कार के सौंदर्य में भी इजाफा करती है।
टिंटेड ग्लास के फायदे
गर्मी के मौसम में टिंटेड ग्लास कई व्यावहारिक फायदे देते हैं, जैसे:
- सीधी धूप से बचाव और इंटीरियर का संरक्षण
- एसी की एफिशिएंसी बढ़ना, जिससे ईंधन की बचत होती है
- अंदर से धूप और तेज रोशनी की कमी
- बाहर से देखने पर कार के अंदर की गोपनीयता बनी रहती है
लेकिन ये फायदे तभी उपयोगी हैं जब विधि सम्मत तरीके से फिल्म लगाई गई हो।
ट्रैफिक नियमों में टिंटेड ग्लास को लेकर सख्ती
भारत सरकार ने ट्रैफिक सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के मद्देनज़र टिंटेड ग्लास पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए हैं। कई आपराधिक मामलों में देखा गया कि काली फिल्म लगी गाड़ियों का उपयोग गलत गतिविधियों के लिए किया गया। इस कारण, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में काली फिल्म पर बैन लगाने का आदेश दिया था।
कानूनी नियम: कितनी होनी चाहिए शीशों की विजिबिलिटी?
सरकार के नियमों के अनुसार:
- फ्रंट और रियर विंडशील्ड की विजिबिलिटी कम से कम 70% होनी चाहिए।
- साइड विंडो की विजिबिलिटी कम से कम 50% अनिवार्य है।
- यदि शीशों की पारदर्शिता इससे कम है, तो उसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
टिंटेड ग्लास पर चालान की प्रक्रिया
अगर आपकी कार पर नियम विरुद्ध टिंटेड ग्लास या काली फिल्म पाई जाती है, तो पुलिस 177 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करती है।
- पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये का चालान
- दूसरी बार पकड़े जाने पर 1500 रुपये तक का चालान
- साथ ही, कार की फिल्म को मौके पर ही हटाने का निर्देश भी दिया जा सकता है।
कैसे बचें चालान से? जानिए सही तरीका
यदि आप गर्मी से बचाव और गोपनीयता दोनों चाहते हैं, तो निम्न नियमों का पालन करें:
- केवल आरटीओ अप्रूव्ड और ISI मार्क्ड फिल्म ही लगवाएं।
- किसी भी लोकल गढ़ी फिल्म का प्रयोग न करें।
- फिल्म लगवाते समय हमेशा विजिबिलिटी मापने की रिपोर्ट लें।
- गाड़ी में अगर टिंटेड ग्लास कंपनी फिटेड है, तो उसका सर्टिफिकेट रखें।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, कार के लिए सही टिंटेड ग्लास चुनना एक बैलेंस का काम है। ऐसे ग्लास चुनें जो नियम के भीतर रहकर आपको गर्मी से राहत और चालान से सुरक्षा दोनों दें। कुछ ग्लास में UV प्रोटेक्शन और हीट रेजिस्टेंस फीचर्स भी आते हैं, जो बिना रंग गहराई के भी असरदार होते हैं।
कंपनियां क्या विकल्प दे रही हैं?
अब कई ऑटो ग्लास कंपनियां ऐसे टिंटेड ग्लास बना रही हैं जो नियमों के भीतर रहते हुए:
- UV किरणों को 99% तक रोकते हैं
- गर्मी कम करने वाले इन्फ्रारेड प्रोटेक्शन प्रदान करते हैं
- साथ ही इनकी पारदर्शिता सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन के अनुसार होती है