अस्पताल से छुट्टी से पहले मिल जाएगा बर्थ सर्टिफिकेट, सरकार ने लिया बड़ा फैसला Birth Certificate Rules 2025

Birth Certificate Rules 2025: सरकार ने आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब देशभर के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले ही उनका जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) प्रदान किया जाएगा।

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) ने सभी राज्य रजिस्ट्रार कार्यालयों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। खासतौर पर उन अस्पतालों को यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। जहां से देश के 50% से अधिक संस्थागत जन्म होते हैं।

सात दिन के भीतर प्रमाण पत्र देना अनिवार्य

रजिस्ट्रार कार्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि बच्चे के जन्म के 7 दिनों के भीतर ही उसका प्रमाण पत्र माता-पिता को दे दिया जाए। यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक किसी भी रूप में हो सकता है। इससे पहले कई मामलों में प्रमाण पत्र मिलने में लंबा समय लगता था। जिससे नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

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जन्म प्रमाण पत्र की मांग में भारी बढ़ोतरी

RGI के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र की उपयोगिता हाल के वर्षों में काफी बढ़ गई है। यह दस्तावेज न केवल सरकारी योजनाओं में आवेदन के लिए बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, पासपोर्ट, विवाह पंजीकरण, संपत्ति रजिस्ट्रेशन और मतदाता सूची में नाम जोड़ने जैसे कई अहम कार्यों के लिए अनिवार्य हो गया है। इसलिए अब यह सुनिश्चित किया गया है कि जन्म के तुरंत बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए। जिससे नागरिकों को कोई अतिरिक्त प्रक्रिया न करनी पड़े।

डिजिटल सिस्टम में हुआ बदलाव

जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अब एक केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम के तहत किया जा रहा है। इसके लिए जनगणना अधिनियम RBD Act, 1969 की धारा 12 के तहत 2023 में संशोधन किया गया। जिसके बाद से यह तय किया गया कि 1 अक्टूबर 2023 से सभी जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केंद्र सरकार के पोर्टल पर ही किया जाएगा।

पहले राज्य अपने-अपने पोर्टल पर डेटा रखते थे और इसे RGI के साथ साझा करते थे। लेकिन अब केंद्र की वेबसाइट पर अपलोड किया गया डेटा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR), राशन कार्ड, संपत्ति पंजीकरण और मतदाता सूची को अपडेट करने में भी काम आता है।

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जन्म प्रमाण पत्र के लिए किन नियमों का पालन जरूरी?

  1. जन्म प्रमाण पत्र रजिस्ट्रार द्वारा RBD अधिनियम 1969 की धारा 12 के अंतर्गत जारी किया जाता है।
  2. संशोधित नियमों के अनुसार सभी पंजीकरण केंद्र सरकार के एकीकृत पोर्टल पर होंगे।
  3. प्रमाण पत्र की समय-सीमा 7 दिन तय की गई है।
  4. इसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जा सकता है।

मार्च में भी रजिस्ट्रार कार्यालय ने दी थी सख्त चेतावनी

मार्च 2025 में भी रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने देशभर के निजी और सरकारी अस्पतालों को आगाह किया था कि वे 21 दिनों के भीतर जन्म व मृत्यु की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दर्ज करें। इस चेतावनी के पीछे यह जानकारी थी कि कुछ अस्पताल जन्मों का पंजीकरण समय पर नहीं कर रहे थे और कानून की अवहेलना कर रहे थे। अब सरकार इस दिशा में सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना चाहती है। ताकि नागरिकों को असुविधा न हो और डिजिटल रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता बनी रहे।

प्रमाण पत्र की अनिवार्यता क्यों है महत्वपूर्ण?

आज के समय में बिना जन्म प्रमाण पत्र के सरकारी योजनाओं में शामिल होना या दस्तावेजी प्रमाण देना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सरकार चाहती है कि हर नागरिक के पास जन्म का प्रमाण पत्र शुरू से ही मौजूद हो। यह दस्तावेज नागरिक की पहचान का सबसे पहला और आधिकारिक रिकॉर्ड होता है और भविष्य में हर प्रकार की सरकारी और निजी सेवाओं के लिए आवश्यक होता है।

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