कम एडमिशन के चलते 280 स्कूल हुए बंद, 26 हजार बच्चों को दूसरे स्कूलों में किया समायोजित School Closed

School Closed: अलीगढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए 30 जून को 280 विद्यालयों का दूसरे स्कूलों में विलय कर दिया। इन विद्यालयों के छात्रों को एक किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के कुशल उपयोग को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

465 विद्यालय अब तक किए जा चुके हैं मर्ज

जिले में कुल 2115 परिषदीय विद्यालयों में से 665 स्कूलों को समायोजित किया जाना है। अब तक तीन चरणों में 465 विद्यालयों का विलय हो चुका है। टप्पल, चंडौस, जवां, खैर, लोधा, धनीपुर, अकराबाद, इगलास, गोंडा, अतरौली, बिजौली, गंगीरी जैसे ब्लॉकों में प्रत्येक में 22 और अलीगढ़ ब्लॉक में 16 विद्यालयों को मिलाकर करीब एक हजार बच्चों को अन्य स्कूलों में समायोजित किया गया है।

कम छात्रों वाले विद्यालय होंगे बाल वाटिका में तब्दील

जिले के जिन 665 विद्यालयों में 50 से कम छात्र पंजीकृत हैं। उन्हें अब बाल वाटिका के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। बाल वाटिका में 3 से 6 साल तक के छोटे बच्चों की शिक्षा पर फोकस किया जाएगा। बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इन विद्यालयों में विशेष रूप से खेल सामग्री, लाइब्रेरी और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।

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शिक्षकों की नौकरी पर नहीं मंडराएगा खतरा

बीएसए ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी विद्यालय पूर्णतः बंद नहीं हो रहा है और न ही किसी शिक्षक की सेवा समाप्त की जा रही है। शिक्षक समायोजित विद्यालयों में अपनी सेवाएं देंगे। यह निर्णय छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने और शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

62 स्कूलों में घटा नामांकन, वेतन वृद्धि पर रोक

एक रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 62 परिषदीय स्कूलों में छात्रों के नामांकन में भारी गिरावट देखी गई है। इसके चलते सभी स्टाफ की वेतन वृद्धि फिलहाल रोक दी गई है।

  • जवां के प्राथमिक विद्यालय भगवानगढ़ी में 488 से घटकर 306 छात्र रह गए
  • सिधौली खुर्द बिजौली में 242 से घटकर 116 बच्चे
  • उमरी चंडौस में 268 से घटकर 142 छात्र
  • पिलखना अकराबाद में 322 से घटकर 201 बच्चे
  • रठगांव जवां, नगला मानसिंह लोधा, शाहजहांबाद और क्वार्सी जैसे कई अन्य स्कूलों में भी 100 से अधिक छात्रों की गिरावट देखी गई।

नामांकन घटने के पीछे क्या कारण?

बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इन स्कूलों में तीन वर्षों में भेजे गए कंपोजिट ग्रांट और मिड डे मील (MDM) की धनराशि की जांच चल रही है। इसके अलावा स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाएं और शिक्षक उपस्थिति भी छात्रों के नामांकन पर असर डालते हैं।

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शिक्षक अनुपस्थित पाए गए

7 से 19 मई के बीच हुए निरीक्षण में अलीगढ़ के परिषदीय विद्यालयों में 40 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

  • निरीक्षण विकास खंड इगलास, गोंडा, धनीपुर, खैर, अकराबाद, अलीगढ़, बिजौली, लोधा और जवां में किया गया।
  • बीईओ, मेडिकल ऑफिसर और चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर की टीम ने जांच की।
  • सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र और अनुदेशक स्तर पर गैरहाजिर शिक्षक चिन्हित किए गए।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम

विद्यालयों का इस प्रकार विलय करना एक ओर जहां सरकारी संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करता है, वहीं दूसरी ओर छात्रों को बेहतर शिक्षण माहौल देने में मददगार साबित हो सकता है। विशेषकर जब बाल वाटिका जैसे मॉडल को लागू किया जा रहा हो, तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में बच्चों की पूर्व प्राथमिक शिक्षा पर सकारात्मक दिखेगा।

सरकारी संकल्प और पारदर्शिता की परीक्षा

हालांकि यह फैसला तर्कसंगत नजर आता है। लेकिन इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर नजर बनाए रखना जरूरी है। जिन विद्यालयों में भ्रष्टाचार, शिक्षक अनुपस्थिति और कमजोर मैनेजमेंट की वजह से नामांकन घटा है, उन पर विशेष कार्रवाई होनी चाहिए।

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