AC Temperature New Rule: गर्मियों का मौसम आते ही एयर कंडीशनर (AC) लोगों के जीवन का जरूरी हिस्सा बन जाता है. लेकिन अब केंद्र सरकार AC तापमान को लेकर एक नया नियम लागू करने जा रही है. जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर असर पड़ेगा और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी. नए प्रस्तावित नियम के तहत ऐसे एसी का उत्पादन किया जाएगा जो सिर्फ 20 डिग्री से 28 डिग्री सेल्सियस के दायरे में ही काम करेंगे. यानी न तो आप AC का तापमान 20 डिग्री से नीचे रख पाएंगे और न ही 28 डिग्री से ऊपर.
एसी के तापमान पर सरकार क्यों कर रही है नियंत्रण?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में जब AC को बहुत कम तापमान (जैसे 18 या 20 डिग्री) पर चलाया जाता है, तो इससे बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है. साथ ही इससे कंप्रेसर पर अत्यधिक दबाव आता है। जिससे सिस्टम फेल होने या फटने का खतरा रहता है. सरकार का मानना है कि अगर एसी तापमान को एक तय सीमा में नियंत्रित किया जाए. तो इससे न सिर्फ बिजली बचत होगी बल्कि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी कम होंगी.
बिजली की खपत में 50% तक की बचत संभव
एमिटी यूनिवर्सिटी के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. बसंत सिंह सिकरवार के अनुसार, यदि 1 से 1.5 टन क्षमता का एसी पूरी रात 20 डिग्री सेल्सियस पर चलता है, तो बिजली का बिल लगभग 3000 रुपये तक आता है. वहीं यदि वही एसी 28 डिग्री सेल्सियस पर चलाया जाए, तो बिजली बिल घटकर 2500 रुपये तक रह जाता है. यानी तापमान सिर्फ 8 डिग्री बढ़ाने से ही 500 रुपये की सीधी बचत हो जाती है.
कंप्रेसर को हटाने की भी योजना
डॉ. सिकरवार ने यह भी जानकारी दी कि एसी में उपयोग होने वाले वाष्प कंप्रेसर साइकिल की तकनीक को भी धीरे-धीरे पर्यावरण अनुकूल विकल्पों से बदला जाएगा. भविष्य में ऐसी तकनीकें अपनाई जाएंगी। जिसमें कंप्रेसर को हटा दिया जाएगा. जिससे न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी.
एसी का कम तापमान सेहत को भी करता है प्रभावित
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि AC का अत्यधिक ठंडा तापमान शरीर पर नकारात्मक असर डालता है. लगातार 18 या 20 डिग्री पर AC चलाने से शरीर को सर्दी, जुकाम, सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं. साथ ही बाहर की गर्मी और अंदर की ठंडक के कारण थर्मल शॉक भी हो सकता है। जिससे इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है.
अब सिर्फ 20 से 28 डिग्री के बीच ही होगा तापमान नियंत्रण
सरकार की योजना के अनुसार अब कंपनियां वही AC बना सकेंगी जो 20 से 28 डिग्री के बीच ही ऑपरेट हों. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उपभोक्ता तापमान को अत्यधिक कम न कर पाएं और इससे बिजली खपत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों पर नियंत्रण रखा जा सके.
ये होंगे उपभोक्ताओं के लिए फायदे
- कम बिजली बिल: तापमान बढ़ाने से ऊर्जा की खपत में भारी कमी आएगी.
- लंबे समय तक AC की कार्यक्षमता बनी रहेगी: अत्यधिक उपयोग से कंप्रेसर खराब नहीं होगा.
- सेहत रहेगी सुरक्षित: न ज्यादा ठंडक, न बीमारी.
- पर्यावरण को राहत: ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा.
- लंबे समय में बचत: कम मेंटेनेंस, कम रिपेयरिंग खर्च.
क्या यह नियम पहले से कहीं लागू हुआ है?
भारत से पहले जापान जैसे विकसित देशों में ऐसे नियम पहले से लागू हैं. वहां घरों और ऑफिसों में एसी तापमान 28 डिग्री पर सेट रखना अनिवार्य है. भारत सरकार भी इसी नीति को अपनाते हुए ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देने जा रही है.
नई तकनीक से जुड़े विकल्पों पर भी चल रहा काम
सरकार और निजी कंपनियां मिलकर अब उन तकनीकों पर भी काम कर रही हैं जो कम बिजली में अधिक ठंडक दे सकें. भविष्य के AC ऐसे होंगे जो स्मार्ट सेंसर, IoT आधारित कूलिंग सिस्टम और कंप्रेसर-फ्री डिजाइन के साथ होंगे. जिससे ऊर्जा की खपत 60% तक घटाई जा सकेगी.
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
- AC खरीदते समय ऊर्जा दक्षता रेटिंग (Star Rating) जरूर देखें.
- कम तापमान की बजाय स्मार्ट तापमान 24-26 डिग्री पर सेट करें.
- सीलिंग फैन का उपयोग साथ में करें, इससे AC पर दबाव कम होगा.
- AC को समय-समय पर सर्विस कराना न भूलें.
नए नियमों से क्या बदलेगा?
सरकार का यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम करेगा. बल्कि देश को ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय खतरों से बचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास साबित होगा.